भूलकर भी न करें ये गलतियां, आपके पास भी आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस !
भूलकर भी न करें ये गलतियां, आपके पास भी आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस !

अगर आप के पास अचानक एक दिन आयकर विभाग से इनकम टैक्स का नोटिस आ जाए तो ये आपके लिए बड़ा सिरदर्द हो सकता है. इनकम टैक्स नोटिस टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से आने वाला एक कम्युनिकेशन है कि आपके टैक्स अकाउंट में कोई गड़बड़ी सामने आई है. आयकर विभाग आपको कई कारणों से नोटिस भेज सकता है. हो सकता है कि आपने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में कुछ गलती कर दी हो, इनकम की सही जानकारी न दी हो .आइए जानते हैं कि किन परिस्थितियों में आपको इनकम टैक्स नोटिस मिल सकता है और आपको कौन सी गलतियां करने से बचनी चाहिए.
रिटर्न में अपनी संपत्ति या आय के बारे में गलत जानकारी
हो सकता है कि आपको आयकर विभाग से ऐसा कोई नोटिस मिले जिसमें आपसे अपनी संपत्ति और आय के बारे में सही बात बताने को कहा जाएगा. अगर आपने गलती से अपने आईटीआर में अपनी संपत्ति और आय सही जानकारी नहीं दी है तो आप इस स्थिति में आ सकते हैं. इसलिए हमेशा अपने असेट और इनकम की सही जानकारी दें. इसके साथ ही अपनी बेसिक इन्फॉर्मेशन यानी एड्रेस पैन नंबर,नाम जैसे डीटेल्स भी सही भरे होने चाहिए.

असल आय और डिक्लेयर की गई आय मैच नहीं करना
अगर आयकर विभाग को लगता है कि आपने अपनी किसी संपत्ति की जानकारी विभाग से छीपा रहे है, तो भी आपको आयकर विभाग से नोटिस आ सकता है. आपके आईटीआर फॉर्म में आय, निवेश से होने वाली कमाई, संपत्ति सबकी डीटेल पूरी होनी चाहिए, क्योंकि अगर आपके प्रोफाइल में कुछ और, लेकिन आईटीआर डिक्लेरेशन में कुछ और दिखेगा तो आपको विभाग से नोटिस भेजा जा सकता.

इनकम या ट्रांजैक्शन में ज्यादा उतार-चढ़ाव
अगर आयकर विभाग इस बात को नोटिस करता है कि आपके ट्रांजैक्शन में बहुत से उतार-चढ़ाव है यानी की आपकी आय अचानक घट गई है या फिर अचानक से बढ़ गई है, तो वो इसपर आपसे जानकारी मांग सकता है. साथ ही अगर आपने कई हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन किए हैं, या हाई वैल्यू संपत्ति या ऐसे ही दूसरे किसी असेट में पैसे लगाए हैं लेकिन आपके टैक्स रिटर्न में इनकी पूरी जानकारी नहीं है तो भी नोटिस भेजा जा सकता है.

TDS क्लेम में कुछ गड़बड़ी की तो
अगर tax deducted at source यानी की TDS भरते वक्त यह Forms 26AS और 16 या 16A की जानकारी के मुताबिक होना चाहिए. अगर ये ठीक नहीं हुआ तो आपको आईटी एक्ट के सेक्शन 143 (1) के तहत नोटिस मिल सकता है.

पहले कभी टैक्स चोरी का केस बन रहा हो
डिपार्टमेंट जरूरत पड़ने पर पहले के टैक्स रिटर्न्स का आकलन भी कर सकता है और अगर ऐसा मामला निकलकर आता है कि आईटीआर में टैक्सेबल इनकम की सही जानकारी नहीं दी गई है तो इसपर सेक्शन 147 के तहत टैक्सपेयर को नोटिस मिल सकता है आपसे जानकारी मांगी जा सकती है.

टैक्स रिटर्न देरी से फाइल करना
क्या आप जानते है ,की टैक्स भरना और टैक्स रिटर्न फाइल करना ये दो अलग-अलग चीजें हैं. आप भले ही टैक्स के दायरे में नहीं आते हों, लेकिन आपको फिर भी अपना रिटर्न जरूर फाइल करना चाहिए. आईटी एक्ट का सेक्शन 142(1)(i) आपसे रिटर्न अनिवार्य रूप से मांग सकता है, वर्ना आपको नोटिस भेजा जा सकता है. आप पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.इसलिए आपको हर असेसमेंट साल में दी गई तारीख के पहले-पहले तक आपको अपना टैक्स रिटर्न फाइल कर लेना चाहिए.

आयकर विभाग का नोटिस कई स्थितियों में आ सकता है, जो निम्नलिखित हो सकती हैं:

  1. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में त्रुटि: यदि आपके द्वारा दाखिल की गई इनकम टैक्स रिटर्न में कोई त्रुटि है या कोई जानकारी अवैध या अपूर्ण है, तो आयकर विभाग एक नोटिस भेज सकता है.
  2. अनुपालन की नकारात्मकता: यदि आयकर विभाग को लगता है कि आप अपनी आयकर योग्यता के नियमों और विधियों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो वे नोटिस जारी कर सकते हैं. यह आपकी आयकर योग्यता की जांच के लिए हो सकता है या आपकी वित्तीय गतिविधियों के संबंध में संशय को स्पष्ट करने के लिए हो सकता है.
  3. परिवहन या बैंक का विशेष जांच: आयकर विभाग किसी व्यापारिक संगठन, परिवहन संस्था, बैंक या अन्य संगठन के वित्तीय प्रक्रियाओं की जांच करना चाह सकता है. इसके लिए वे एक जांच नोटिस भेज सकते हैं.
  4. विशेष संदर्भों पर जांच: जब आयकर विभाग के पास किसी व्यक्ति या संगठन के विशेष संदर्भों पर आयकर जांच करने की आवश्यकता होती है, तो वे नोटिस भेज सकते हैं. ये संदर्भ विभिन्न कारणों से हो सकते हैं, जैसे अद्यतनित जानकारी, विवादित लेन-देन, विशेष प्रतिबंध आदि.

आपको इस संदर्भ में सलाह दी जाती है कि यदि आपको किसी आयकर विभाग के नोटिस के संदर्भ में संदेह होता है, तो आपको एक कानूनी सलाहकार से संपर्क करना चाहिए और उनकी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए.